

तोलमा में जंगली हाथियों का आतंक! महीनों से दहशत में ग्रामीण, प्रशासन अब भी मौन
लैलूंगा क्षेत्र के तोलमा इलाके में इन दिनों जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार हाथियों का झुंड आए दिन गांव के आसपास विचरण कर रहा है, जिससे लोगों में भय और दहशत का माहौल बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि महीनों बीत जाने के बावजूद प्रशासन और जिम्मेदार विभाग इस गंभीर समस्या को लेकर अब तक ठोस कदम उठाते नजर नहीं आ रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में फिर से हाथियों के झुंड ने इलाके में दस्तक दी है। हालांकि इस बार अभी तक किसी प्रकार की जनहानि या बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन गांव के लोग रात-रात भर जागकर अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा कर रहे हैं। खेतों और घरों के आसपास हाथियों की आवाजाही से ग्रामीणों का जीना मुहाल हो गया है।
विगत दिनों जब हाथियों का झुंड तोलमा क्षेत्र में पहुंचा था, तब उन्होंने ग्राम के निवासी लखन साय पैंकरा के घर पर हमला कर दिया था। हाथियों ने घर में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की और भारी नुकसान पहुंचाया। घटना के बाद पीड़ित परिवार ने इसकी सूचना तत्काल वन विभाग और राजस्व विभाग को दी थी, ताकि मौके पर पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया जा सके और राहत दिलाई जा सके।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि सूचना देने के बाद भी न तो वन विभाग का कोई कर्मचारी मौके पर पहुंचा और न ही क्षेत्र के विट गार्ड या राजस्व विभाग के पटवारी ने घटनास्थल का दौरा किया। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी और असंतोष देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होगा, तब तक शायद प्रशासन की नींद नहीं खुलेगी।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि हाथियों की समस्या इस इलाके में नई नहीं है। हर साल हाथियों का झुंड गांव के आसपास पहुंच जाता है, जिससे फसलों और मकानों को नुकसान होता है। इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। वन विभाग की लापरवाही के कारण ग्रामीणों को अपनी सुरक्षा खुद ही करनी पड़ रही है।
गांव के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल वन विभाग की टीम को मौके पर भेजा जाए, हाथियों को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर खदेड़ा जाए और जिन लोगों को नुकसान हुआ है उन्हें जल्द मुआवजा दिया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए ठोस योजना बनाई जाए।
फिलहाल तोलमा क्षेत्र के ग्रामीण हाथियों के डर के साये में जीने को मजबूर हैं और प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं कि आखिर कब उनकी समस्या का समाधान होगा। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला और भी गंभीर रूप ले सकता है।
