
राष्ट्रमाता” की मांग पर फरसाबहार में फूटा आक्रोश! तहसील दफ्तर बना हुंकार का अखाड़ा
फरसाबहार।
गौ माता को “राष्ट्रमाता” घोषित करने की मांग अब सिर्फ भावनाओं तक सीमित नहीं रही—बल्कि यह जनआंदोलन का रूप लेती दिख रही है। ‘गौ सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत फरसाबहार में आज गौ-भक्तों, संतों और गौ-रक्षकों ने जबरदस्त हुंकार भरी और प्रशासन के माध्यम से देश के शीर्ष नेतृत्व—राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर बड़ा संदेश दिया।
तहसील कार्यालय का माहौल उस वक्त गरमा गया जब बड़ी संख्या में जुटे गौ-भक्तों ने एक सुर में कहा—
“गौ माता का सम्मान अब कानून में दिखना चाहिए!”
इस दौरान माहौल पूरी तरह धार्मिक आस्था और जोश से भरा रहा। नारों की गूंज और मांगों की तीव्रता ने यह साफ कर दिया कि यह मुद्दा अब गांव-गांव से उठकर प्रशासनिक गलियारों तक पहुंच चुका है।
आंदोलन की चेतावनी भी!
कार्यक्रम में मौजूद गौ-रक्षकों और संतों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर जल्द ही इस मांग पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो यह अभियान और उग्र रूप ले सकता है।
इन चेहरों ने संभाली कमान:
इस पूरे कार्यक्रम में प्रमुख रूप से
विनय शर्मा, अशोक यज्ञिक, अक्षत जायसवाल, समीर ताम्रकार, संतोष साव, हर्ष ताम्रकार, कार्तिक साहू, कौतुक शर्मा, आयुष साहू, दुर्गेश बरेठ, नीरज चौधरी, योगेश बरेठ, पप्पू जायसवाल, प्रशांत पाणिग्रही और कान्हा सोनी की सक्रिय भागीदारी रही।
सवाल बड़ा है…
क्या “राष्ट्रमाता” का दर्जा मिलेगा?
या फिर यह भी बाकी मांगों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?
फरसाबहार से उठी यह हुंकार अब सत्ता के दरवाजे पर दस्तक दे रही है… जवाब देना ही होगा!
