लैलूंगा। विकासखंड लैलूंगा से महज 3 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत कुंजारा के आश्रित मोहल्ला बांधापारा का आंगनवाड़ी भवन वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़ा हुआ है। भवन की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि वहां बच्चों को बैठाना भी सुरक्षित नहीं माना जा रहा है। मजबूरी में आंगनवाड़ी केंद्र का संचालन किसी अन्य घर के परछी (बरामदे) में किया जा रहा है, जहां बच्चों को पढ़ाया और विभिन्न गतिविधियां कराई जा रही हैं।


ग्रामीणों एवं पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि आंगनवाड़ी भवन की मरम्मत एवं सुधार के लिए कई बार महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों तथा सुपरवाइजर को लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है। इसके अलावा राज्य सरकार के सुशासन तिहार के दौरान भी इस समस्या की शिकायत दर्ज कराई गई थी। बावजूद इसके आज तक भवन की मरम्मत या पुनर्निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि छोटे-छोटे बच्चों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित होकर अस्थायी व्यवस्था में शिक्षा और पोषण संबंधी सेवाएं प्राप्त करनी पड़ रही हैं। ऐसे में बच्चों के सर्वांगीण विकास और सुरक्षित भविष्य की कल्पना करना कठिन प्रतीत होता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन एवं महिला बाल विकास विभाग से शीघ्र कार्रवाई करते हुए जर्जर आंगनवाड़ी भवन की मरम्मत अथवा नए भवन के निर्माण की मांग की है, ताकि नौनिहालों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिल सके।
“जहां बचपन सुरक्षित नहीं, वहां सुनहरे भविष्य की उम्मीद कैसे की जा सकती है?”
यह सवाल आज बांधापारा के ग्रामीण प्रशासन से पूछ रहे हैं।
