लैलूँगा में शराबियों का आतंक, खेतों के किनारे फोड़ी जा रहीं बोतलें
21 जून 2026 रायगढ़। जिले के लैलूंगा क्षेत्र में एक गंभीर समस्या किसानों और ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। शराब का सेवन करने वाले कुछ लोग शराब की बोतलों को रास्तों, खेतों के किनारों और सार्वजनिक स्थानों पर फोड़कर फेंक रहे हैं। इससे न केवल पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, बल्कि किसानों, ग्रामीणों और मवेशियों की सुरक्षा पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है। हमारी विशेष रिपोर्ट।
ये तस्वीरें लैलूंगा क्षेत्र की हैं, जहां खेतों के आसपास और ग्रामीण सड़कों के किनारे बड़ी संख्या में टूटी हुई शराब की बोतलें देखी जा सकती हैं। शराब पीने के बाद कुछ असामाजिक तत्व बोतलों को यहीं फोड़कर छोड़ देते हैं। इस लापरवाही का सबसे ज्यादा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। खेतों में हल चलाते समय या खेती-किसानी के अन्य कार्यों के दौरान टूटे हुए कांच उनके पैरों और हाथों को गंभीर रूप से घायल कर सकते हैं।
“खेत में जगह-जगह टूटी हुई बोतलें पड़ी रहती हैं। काम करते समय चोट लगने का डर बना रहता है। कई बार मजदूर और किसान घायल भी हो चुके हैं।”
सिर्फ किसान ही नहीं, मवेशी चराने वाले ग्रामीण और पशु भी इस समस्या से प्रभावित हो रहे हैं। टूटे हुए कांच पर पैर पड़ने से गहरे घाव हो सकते हैं, जिससे संक्रमण, टिटनेस और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
“गाय-बैल और अन्य पशु चरने जाते हैं तो टूटे कांच से घायल हो जाते हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी यह खतरा बना हुआ है।”
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को इस ओर तत्काल ध्यान देना चाहिए। शराब की दुकानों के आसपास जागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों पर बोतलें फोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।